श्री गोरखनाथ आरती

गोरखनाथ-आरती
गोरखनाथ-आरती

!! श्री गोरखनाथ आरती !!

जय गोरख देवा जय गोरख देवा।
कर कृपा मम ऊपरनित्य करूं सेवा ॥

शीश जटा अतिसुन्दर भाल चन्द्र सोहे।
कानन कुण्डल झलकत निरखत मन मोहे॥

गल सेली विच नाग सुशोभित तन भस्मी धारी।
आदि पुरुष योगीश्वर सन्तन हितकारी॥

नाथ निरंजन आप हीघट-घट के वासी।
करत कृपा निज जन परमेटत यम फांसी॥

ऋद्धि सिद्धि चरणों में लोटत माया है दासी।
आप अलख अवधूता उत्तराखण्ड वासी॥

अगम अगोचर अकथ अरूपी सबसे हो न्यारे।
योगीजन के आप हीसदा हो रखवारे॥

ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा निशदिन गुण गावें।
नारद शारद सुर मिल चरनन चित लावें॥

चारों युग में आप विराजत योगी तन धारी।
सतयुग द्वापर त्रेता कलयुग भय टारी॥

गुरु गोरख नाथ की आरती निशदिन जो गावे।
विनवत बाल त्रिलोकी मुक्ति फल पावे॥

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