बसन्त पंचमी और शाही स्नान का संयोग क्यों खास है ?

प्राय: वर्ष भर में छ: ऋतुयें होती है जिनमें से वसन्त ऋतु भी मुख्य एक है फाल्गुन और चैत्र मास में वसंत ऋतु मानी गई है । माघ के महीने की पंचमी को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इसे श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस ऋतु के प्रारम्भ होते ही शर्दियां कम होने लगती हैं और मौसम में धीरे धीरे गर्माहट का अहसास होने लगता है। ऐसा कह सकते हैं कि मौसम सुहावना हो जाता है। पेड़ों में नए पत्ते आने लग जाते हैं। और आम के पेड बौरों से लद जाते हैं । चारों तरफ़ खेत सरसों के फूलों से भर जाते हैं और ऐसा मौसम मन को मोह लेता है ।

यद्यपि हर ऋतु का अपना अलग महत्व है परन्तु यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी गई है और इसीलिये इसे ऋतुराज के नाम से भी जाना जाता है। इस बार कुम्भ पर्व है और पर्व के दौरान बसन्त पंचमी का होना अपने आप में एक सौभाग्य का योग है। इस बार बसन्त पंचमी के दिन कुम्भ पर्व का चौथा शाही स्नान होगा ।

हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार बसन्त पंचमी के दिन मां सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था। अत: इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने का अपने आप में खास महत्व है। अत: कुम्भ पर्व में इस दिन के स्नान की और भी महत्ता बढ जाती है। माघी पूर्णिमा इस बार 19 फरवरी को है और इस दिन पांचवां शाही स्नान है और इस दिन भी तीर्थ स्नान ,दान का विशेष महत्व होता है। पुराणों में कहा गया है कि इस दिन भगवान विष्णु स्वयं गंगा जल में निवास करते हैं। कुम्भ के दौरान इस दिन का महत्व और भी बढ जाता है । इस कुम्भ का आखिरी और छठा शाही स्नान सोमवार 4 मार्च 2019 को महा शिवरात्रि के दिन होगा। भगवान शिव और माता पार्वती के इस पावन पर्व पर कुंभ में आए सभी भक्त इस दिन स्नान करके अपने घरों को लौट जाते हैं।

Please follow and like us:
Total Page Visits: 139 - Today Page Visits: 1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Log in now to claim your offerClick here