
जीवन में जब कई बार उतार चढ़ाव की स्थिति आती है, तो अधिकतर लोगों की कुंडली में राहु का दोष पाया जाता है। इसे छाया ग्रह भी कहा जाता है और इसकी महादशा के चलते व्यक्ति के जीवन में अनचाहे बदलाव, अनिश्चित्ता और भ्रम की स्थिति पैछा होने लगती है। दरअसल, कुंडली के अन्य ग्रहों की स्थिति पर इसकी चाल निर्भर करती है। खासतौर से केतु की चाल का असर इस छाया ग्रह पर भी दिखने लगता है। ज्योतिष के अनुसार राहू और केतु दोनों ही ग्रह वक्री चाल चलते हैं। इसका अर्थ ये है कि यह एक राशि में डेढ़ साल तक बने रहते हैं। इस दोनों ग्रहों को मायावी ग्रह भी कहा जाता है। इस लेख में आगे बढ़ने से पहले इस बात को समझना ज़रूरी है कि राहू की महादशा किसे कहा जाता है।
राहू की महादशा किसे कहते हैं
ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कई बार राहू उच्च का होता है और कभी कभार नीच का भी होता है। अगर इसकी दशा उच्च की है, तो इससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव और सौभाग्य बढ़ने लगता है। वहीं अगर यह नीच का होता है, तो व्यक्ति को मन मुताबिक कार्य और सफलता नहीं मिल पाती है। इसके अलावा अगर ग्रहों की मूल्यांकन किया जाए, तो सूर्य, चंद्र और गुरू की अंर्तदशा में भी यह छाया ग्रह शुभ फल प्रदान नहीं करता है।
इसके अलावा राहू की महादशा व्यक्ति के जीवन में 18 वर्षों तक चलती है, जो बेहद रहस्यमयी होती है। इसमें व्यक्ति का उत्थान भी हो सकता और कई बार यह पतन के लिए भी सहायक साबित होती है। इसकी खास बात ये है कि इसका कोई आकार नहीं है, मगर फिर भी इसका प्रभाव अति गहरा होने लगता है।
राहू ग्रह कैसे उत्पन्न हुआ
पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत की प्राप्ति हुई, तो उस वक्त देवताओं और असुरों के मध्य युद्ध छिड़ गया। यह संघर्ष दिनों दिन बड़ रहा था और इसका दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर लिया। उन्होंने अब देवताओं को अमृत पिलाना आरंभ कर दिया। उस दौरान एक असुर स्वरभानु भी अमृत चखना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक असुर का रूप धारण कर लिया और फिर अमृतपान किया। इस बात की सूचना भगवान विष्णु को दे दी गई। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। मगर अमृतपान के चलते सिर यानि राहू और धड़ यानि केतु अमर हो गए। मगर भगवान विष्णु तक स्वरभानु की बात पहुंचाने के चलते सूर्य और चंद्र ग्रह राहू केतु के दुश्मन बन गए। इस कथा के अनुसार अमृत पीने के चलते राहू किसी व्यक्ति के भौतिक सुख प्रदान करता है। मगर वहीं उसका सिर कटने के कारण यह व्यक्ति को धोखा और भ्रम की स्थिति में भी रखता है।
राहू की महादशा में जीवन में इन चुनौतियों को सामना करना पड़ता है
लक्ष्य को लेकर दुविधा
छाया ग्रह की महादशा के कारण व्यक्ति के जीवन में असमंजस की स्थिति बनी रहती है। व्यक्ति खुद को दिशाहीन महसूस करने लगता है। जीवन में कई संघर्षों का सामना करना पउ़ता है। काम को लेकर भ्रम और भ्य की स्थिति बनी रहती है।
निर्णय लेने में असमर्थता
ऐसी स्थिति में व्यक्ति जीवन में कोई भी फैसला नहीं ले पाता है और हर काम को लेकर दुविधा में रहता है। सप्तम भाव में राहू होने से करियर में उठापटक और उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं। इसका असर वैवाहिक जीवन पर भी दिखने लगता है। मगर ऐसे में जातक कोई फैसला नहीं ले पाता है।
घर परिवार में कलक
ऐसे लोग जिनकी कुंडली में राहू चतुर्थ भाव में हैं, उनके पारिवारिक जीवन में अशांति देखने को मिलती है। इसमें परिवार के सदस्या एक दूसरे के साथ बात करने और बैठने से भी कतराने लगते है। साथ ही ईष्या से भी लिप्त रहते हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव बना रहता है। इसके अलावा परिवार में अलगाव की स्थिति बन जाती है और सामाजिक मान सम्मान में भी हानि होती है।
धनहानि का सामना
ऐसे में अचानक व्यवसाय में नुकसान और धनहानि की आशंका बनी रहती है। खर्च बढ़ने लगते हैं और वित्तीय संकट का भी सामना करना पड़ता है। इसके अलावा धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ता है। निजी जीवन में बेवजह के खर्चे भी बढ़ने लगते हैं।
आध्यात्म से दूरी का बढ़ना
अक्सर मन में नकारात्मक विचार बढ़ने लगते है। इसके चलते धर्म व आध्यात्म से दूरी बनने लगती है और व्यक्ति जीवन में खुद को भटका हुआ महसूस करता है। कुंडली में राहू की महादशा के कारण धार्मिक भटकाव बढ़ने लगता है।
कुंडली में मौजूद राहू से बचने के लिए अपनाएं यह उपाय
दान पुण्य है ज़रूरी
शनिवार के दिन तिल, नारियल, लोहे का सामान, उड़द की दाल और कंबल आदि दान करें। इसके अलावा ज़रूरतमंदों को भोजन करवाने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
उपवास रखें
इस स्थिति से खुद को बाहर निकलने के लिए शनिवार के दिन व्रत करें और भैरव देव की भी पूजा अर्चना करें। इसके अलावा दुर्गा सप्तशती का भी पाठ करें। उपवास को नियमानुसार रखने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है।
राहू मंत्र का करें जाप
ॐ रां राहवे नमः इस मंत्र का दिन में 108 बार जाप करें। इससे जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति मिलने लगती है। इस बीज मंत्र को नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल करने से राहू का प्रभाव कम होने लगता है। इसके अलावा हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंगलवार व शनिवार के दिन हनुमान मंदिर दर्शनों के लिए अवश्य जाएं।
लोहे की अंगूठी पहनें
ऐसे लोग जिनकी राहू की महादशा चल रही है। उन्हें गोमेद रत्न धारण करना चाहिए। इसके अलावा लोहे की अंगूठी पहनने से भी फायदा मिलता है। साथ ही झूठ बोलना और किसी का दिन दूखाने से भी बचें।
कुछ सामान्य प्रश्न
कितने वर्षों तक राहू की महादशा रहती है।
किसी व्यक्ति के जीवन में राहू की महादशा 18 साल तक रहती है। इस दौरान व्यक्ति को अपने जीवन में कई उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।
छाया ग्रह यानि राहू की महादशा के दौरान कौन सा रंग न पहनें।
ऐसे लोग जो राहू की महादशा का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस दौरान भूरे रंग को पहनने से बचना चाहिए। दरअसल, इससे राहू का प्रभाव बढ़ सकता है। खुद को शांत रखने के लिए सफेद, हरा और पीला रंग पहनें। इससे जीवन में शांति मिलती है।
राहू की महादशा के प्रभाव को शांत करने के लिए कौन सा व्रत रखना लाभदायक होता है।
कुंडली में अगर राहू का प्रभाव नज़र आ रहा है, तो हर मंगलवार हनुमान जी और शनिवार शनिदेव का व्रत अवश्य रखें। इससे प्रभु की कृपा अपने भक्तों पर बनी रहती है।
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