Hanuman Chalisa: How it balances planetary energy

Devotees chanting Hanuman Chalisa in front of Lord Hanuman idol for peace and planetary balance

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, जो संकटों को दूर करके अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और राहू केतु के प्रभाव से भी मुक्त करने में मददगार साबित होते है। यकीनन ग्रहों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है और उनकी शांति व जीवन में सुख समृद्धि बनाए रखने के लिए हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि शक्ति से भरपूर बीजमंत्र है, जिसे करने से भय और ग्रह दोष से पीडित लोगों की समस्याएं अपने आप दूर हो जाती है। नियमित रूप से इसका जाप करने से मन में एकाग्रता और सामंजस्य बढ़ने लगता है।

हनुमान जयंती 2026 कब है (Dates of Hanuman Jayanti 2026)

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हनुमान जयंती मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार साल 2026 में यह तिथि 1 अप्रैल सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर आंरभ होगी, जिसका समापन अगली सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर होगा। इसी के चलते हनुमान जयंती 2 अप्रैल को ही मनाई जाएगी। इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था और उनकी पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है। हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से भक्तों का हनुमान जी का आर्शीवाद प्राप्त होता है। अंजनी पुत्र हनुमान जी को भगवान शिव का ही अंश माना जाता है।

रोज़ाना हनुमान चालीसा का पाठ करने से मिलते है कई फायदे (Benefits and power of daily chanting of Hanuman Chalisa)

राहु केतू का दोष समाप्त हो जाना

किसी व्यक्ति के रिश्ते और उसके कारोबार की दशा की जानकारी उसकी कुंडली से ली जा सकती है। कई बार कुंडली में राहू केतु का प्रभाव रहने से मानसिक अशांति और रिश्तों में उथल पुथल नज़र आने लगती है। साथ ही कार्यों में भी देरी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में हनुमान जी का आर्शीवाद व्यक्ति के जीवन में ग्रह दोष समाप्त हो जाता है और आत्म नियंत्रण बढ़ने लगता है।

शनि ग्रह का दोष होगा दूर

साढ़ेसाती और शनि की ढ़ैय्या के चलते सभी कार्यो में देरी और रूकावटें आने लगती है। दरअसल, शनि व्यक्ति को टेस्ट करने का काम करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति नियमित रूप से और सच्चे मन से हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का जाप करता है, शनिदेव उनके जीवन में आने वाले दुखों को दूर कर देते है। इससे शनि ग्रह का दुष्प्रभाव अपने आप कम होने लगता है।

मंगल ग्रह के प्रभाव से मिलेगी मुक्ति

ऐसे लोग जिनकी कुंडली में मंगल दोष पाया जाता है, उनके जीवन में विवाह से संबधी कार्यो में विलंब आने लगता है। इसके अलावा साहस और आत्मविश्वास में भी कमी पाई जाती है। वह लोग जो हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करते है, उनके सभी दुख दूर होने लगते है और कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मज़बूत होने लगती है।

बुरी नज़र से होती है रक्षा

अक्सर कुछ लोगों को नज़र दोष बढ़ने लगता है, जिससे स्वास्थ्य संबधी समस्याएं बढ़ने लगती है और बनते काम भी बिगड़ जाते है। ऐसे में बुरी नज़र के प्रभाव से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ रोज़ करने की सहाल दी जाती है। इससे दुख और पीड़ा समाप्त हो जाती है।

बृहस्पति की स्थिति मज़बूत होना

धन का ज्ञान का कारक माना जाता है बृहस्पति। ऐसे लोग जिनका यह ग्रह कमज़ोर होता है, उनमें अंहकार बढ़ने लगता है और वह खुद को ज्ञानवान समझने लगते है। ऐसे में अगर हनुमान जी का पाठ किया जाए, तो उससे धन की स्थिति मज़बूत बनने लगती है और अंहकार का नाश होता है।

मंगल दोष किसे कहते हैं (What is Mangal dosh)

कुंडली में यह दोष तीन प्रकार का होता है। सौम्य, मध्यम और कड़क। अगर किसी की कुंडली में सौम्य मंगल प्रभाव होता है, तो इसका अर्थ है कि इसका नकारात्मक प्रभाव कम है। मध्यम प्रभाव का अर्थ है कि मंगल दोष व्यक्ति के जीवन पर 28 साल के बाद अपने आप कम होने लगता है। इसके बाद आती है कड़क की बारी। वह लोग जिनका मंगल ग्रह कड़क प्रभाव देता है, उसका असर जीवन में गंभीर होता है। कमज़ोर मंगल की स्थिति से न केवल जीवन में दोष उत्पन्न होता है बल्कि कोई भी ज़रूरी फैसला लेने से पहले भी सोच विचार करना अनिवार्य होता है। वहीं दूसरी ओर मज़बूत मंगल की स्थिति से जीवन में नेतृत्व क्षमता का विकास होता है और आत्मविश्वास उच्च पाया जाता है।

हनुमान चालीसा मंगल ग्रह और उसकी ऊर्जा के प्रभाव को किस प्रकार प्रभावित करता है (How does it influence Mars planet and its energy)

ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह अग्नि का प्रतिनिधि है, जो सक्रिय और उग्र माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में ऊर्जा पाई जाती है। इसका असर व्यक्ति के स्वभाव और कारोबार पर दिखने लगता है। ऐसे में हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने से व्यक्ति में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य भी उचित बना रहता है और भय से भी मुक्ति मिल जाती है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में मंगल का दोष होता है। उन्हें मंगल देव की पूजा के साथ मंगलवार को हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए।

 हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)

।। चौपाई ।।
 
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर। 1
 
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा। 2
 
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी। 3
 
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा। 4
 
हाथ बज्र ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।5
 
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।6
 
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।7
 
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।8
 
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।9
 
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।10
 
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।11
 
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।12
 
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।13
 
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।14
 
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।15
 
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।16
 
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।17
 
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।18
 
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।19
 
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।20
 
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत आज्ञा बिनु पैसारे।21
 
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।22
 
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।23
 
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।24
 
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।25
 
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।26
 
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।27
 
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।28
 
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।29
 
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।30
 
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।31
 
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।32
 
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।33
 
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।34
 
और देवता चित्त धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।35
 
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।36
 
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।37
 
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।38
 
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।39
 
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।40। 
 
।। दोहा ।।
 
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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