

बार बार ब्रेकअप होने के बाद अक्सर मन में यही सवाल उठने लगता है कि हमें हमारा सच्चा जीवनसाथी यानि सोलमेट (Soulmate) कब तक मिलेगा। क्या शादी अरेंज होगी या लव इस सवाल का जवाब जानने के लिए भी उत्सुकता बनी रहती है। लेकिन अगर हम यूं कहें कि आपकी कुंडली के आधार पर इन सभी सवालों के जवाब आसानी मिल सकते हैं, तो क्या आप यकीन कर पाऐंगे। दरअसल, कुंडली में ग्रहों की दशा व्यक्ति के व्यक्तित्व से लेकर उसकी शादीशुदा जिंदगी तक सभी चीजों को ब्यां कर सकती है। कई बार ग्रहों की बदलती चाल जहां वैवाहिक जीवन में परेशानी का कारण बनती हैं, तो वहीं कई बार बिगड़े कामों को बना भी सकती है। पहले हमें यह समझना होगा कि किस प्रकार से ज्योतिष शास्त्र इस बात को व्यक्त कर सकता है कि किसी व्यक्ति के जीवन में विवाह का योग कब तक बनेगा। साथ ही सोलमेट (Soulmate) किसे कहते हैं।
वैदिक ज्योतिष के हिसाब से सोलमेट (Soulmate) किसे कहा जाता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोलमेट (Soulmate) उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसके साथ आपका पिछले जन्मों का कार्मिक बंधन हैं। यह रिश्तो बार बार जुड़ने और टूटने वाले रिश्तों से दूर कर्मो के आधार पर जुड़ने वाला एक अटूट बंधप होता है। ज्योतिष के हिसाब सेए सोलमेट (Soulmate) कनेक्शन कुछ खास तरीकों से भी पता लगाया जा सकता है।
जानते हैं वो तरीके जिससे सोलमेट (Soulmate) कनेक्शन का पता लगाया जाता है।
कुंडली में सातवां घर
अगर बात कुंडली में सातवें घर की करें, तो वह किसी व्यक्ति की शादी, जीवनसाथी और पार्टनरशिप को दर्शाता है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति का विवाह कब होगा और आपकी आगे की वैवाहिक जिंदगी कैसी रहने वाली है। ग्रहों की दशा कुंडली को कई प्रकार से प्रभावित करती है।
पांचवा घर
अगर किसी व्यक्ति का अपने जीवनसाथी के साथ कनेक्शन जानना चाहते हैं, तो पांचवा घर बेहद मददगार साबित होता है। इससे दो लोगों के मध्य बनने वाले इमोश्नल कनेक्शन को पहचाना जा सकता है यानि आप अपने सोलमेट (Soulmate) से कितने कनेक्टिड नज़र आते हैं।
12वां घर और केतु ग्रह की चाल
जब बात हम कार्मिक रिलेशनशिप की करते हैं, तो इसका अर्थ कि किसी व्यक्ति के जीवन में ऐसे व्यक्ति का आपा, जिससे पुराने जन्मों का रिश्तो है। यह ग्रह किसी व्यक्ति के पिछले जन्म में हुए कर्मों पर रोशनी डालता है। इसके अलावा स्पिरिचुअल बॉन्ड भी दर्शाता हैं।
ग्रहों की दशा और चाल
हर पल ग्रहों की दशा और दिशा में बदलाव होते रहते हैं। इसका असर व्यक्ति की पूरी जिंदगी पर पड़ता है। ग्रहों की समय सीमा और उनकी चाल किसी भी रिश्ते की ज़रूरी घटनाओं का दर्शाते हैं।
वीनस यानि शुक्र ग्रह
अगर शुक्र ग्रह की बात करें, तो यह जीवन में ऐश्वर्य, प्रेम और लग्ज़री को दर्शाता है। रोमांटिक कम्पैटिबिलिटी का जब जिक्र आता है, तो उस वक्त वीनस एक सेंट्रल ग्रह माना जाता है। इससे आप जान सकते है कि आपके अपने जीवन साथी से रिश्ते मधुर रहेंगे या नहीं। इसके अलावा आप अपने पार्टनर से आकर्षित हैं या नहीं। इससे रिश्तों में आपसी सामंजस्य नज़र आने लगता है। वह जोग जिनकी कुंडली में शुक्र उच्च का होता है। वह व्यक्ति जीवन में प्यार और सराहना महसूस करता है।
बृहस्पति यानि जुपिटर
बृहस्पति ग्रह बुद्धि का कारक होता है। ऐसे लोग धर्म से जुड़े होते हैं और ज्ञान की इनमें अधिकता होती है। इससे जीवन में विकास बढ़ता है। साथ ही रिश्तों में आपसी तालमेल भी स्थापित करता है। इसे नौ ग्रहों में सबसे महान और श्क्तिशाली समझा जाता है। इस नवग्रहों में गुरू माना जाता है। यह धन, विवाह और संतान के मामलों को प्रभावित करता है। इस ग्रह से पूरा वैवाहिक जीवन टिका होता है। अब कैसे पता लगाएं कि आपकी कुंडली में बृहस्पति की दशा कैसी है। इसका सबसे बड़ा संकेत ये है कि अगर आपका विवाह समय पर हो चुका है, तो इसका अर्थ हे कि कुंडली में आपका बृहस्पति उच्च का है।
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