Shani Mahadasha: Know Signs, Duration & Remedies

Shani Mahadasha is considered a time when Saturn begins to bestow upon you the fruits of your karma

कुंडली जब दिखाई जाती है, उस वक्त कुछ ग्रह ऐसे है, जिनकी स्थिति जानने की उत्सुकता हर व्यक्ति में बनी रहती है। उन्हीं में से एक है शनि ग्रह की दशा। मन में कई सवाल उठते हैं कि वो कुंडली में किस स्थान पर है और उसका जीवन पर क्या प्रभाव हो सकता है। क्या शनि की ढैय्या चल रही है या साढेसाती से होकर गुज़र रहे है। दरअसल, शनि को लेकर लोगों के मन में भय की स्थिति बनी रहती है। वास्तव में इस ग्रह को कर्म फलदाता कहा जाता है, जो जीवन में आपकी खुशियां छीनने नहीं बल्कि आपको अनुसासन सिखाने आते हैं। आइए समझते हैं कि शनि की महादशा किसे कहते हैं और यह कब तक रहती है। साथ ही इससे बचने के लिए किन उपायों की मदद ली जा सकती है।शुरूआत करते हैं इसके अर्थ से। 

शनि की महादशा किसे कहते हैं

अगर आप शनि की महादशा से ग्रस्त है, तो यह एक ऐसा समय माना जाता है, जब शनि आपको आपके कर्मों का फल देने लगता है। इसका अर्थ ये है कि अगर आप सच्चाई और अनुशासन से कार्य करेंगे, तो सफलता और स्थिरता बढ़ने लगती है। वहीं अगर आप कार्य उचित प्रकार से नहीं करेंगे, तो उसका परिणाम भी बुरा होगा। इससे कार्यों में देरी, ज्यादा मेहनत और रिश्तों में तनाव बढ़ जाता है।

शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति के जीवन में शनि की महादशा 19 वर्षों तक रहती है। इस दौरान उसे इस जन्म और पिछले जन्मों के कर्मों, कष्ट और तनाव सब कुछ मिलता है। अगर शनि शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति तरक्की करता है और अगर शनि की स्थिति कमज़ोर हो, तो उसे संघर्षों का सामना करना पड़ता है।

शनि की महादशा के दौरान किन लक्ष्णों का सामना करना पड़ता है

कार्य में देरी

चाहे नौकरी हो, विवाह हो या प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला। इस तरह के कामों में व्यक्ति को देरी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शुभ कार्यों में भी विघ्न आने लगते हैं। 

तनाव का बढ़ना

अक्सर लोगों को छोटी छोटी बातों को लेकर चिंताएं घेरने लगती हैं। व्यक्ति मन ही मन हर बात के लिए खुद को दोषी मानने लगता है। इसका असर नींद पर भी पड़ने लगता है, जिससे दिनभर सुस्ती बनी रहती है और कार्य करने में मन नहीं लग पाता है।

आथिक तंगी

व्यक्ति खुद को आर्थिक रूप से कमज़ोर मानने लगता है। बिना सोचे समझे खर्च करने के बाद अफसोस होता है और अपने आप को कोसने लगता है। ज्योतिष के अनुसार शनि की महादशा के दौरान धन हानि और धन मिलने में रूकावटों का सामना करना पड़ता है। रूका हुआ धन नहीं मिल पाता है और व्यक्ति गलत संगत का भी शिकार हो सकता है।

रिश्तो में बढ़ती दूरियां

ऐसे समय में व्यक्ति खुद को अकेला समझने लगता है। ऐसे रिश्ते जो बेहद करीबी होते हैं, उनमें भी दूरियों का सामना करना पड़ता हैं।शनि की महादशा के दौरान व्यक्ति खुद को अकेला समझने लगता है और एकांत में रहने लगता है। इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलता है।

शारीरिक कष्टों का बढ़ना

अधिकतर लोगों को जोड़ों में दर्द, कमर में तकलीफ और पैरों की समस्या का सामना करना पड़ता है। शनि को कर्म फलदाता कहा जाता है, वो व्यक्ति की कुंडली में आकर उसे अनुशासन और धैर्य सिखाता है। इस दौरान लोगों को उनके कर्मों का फल प्राप्त होता है।

शनि की महादशा से बचने के लिए क्या उपाय करें

पूजा पाठ करें

ऐसे लोग जिनकी कुंडली में शनि की महादशा चल रही है, उन्हें नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाकर उनकी पूजा करें। इससे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही शनि स्त्रोत भी पढ़ें।

दान करें

ऐसे लोग जो ज़रूरतमंद है, उन्हें कपड़ों, खाने की वस्तुओं और धन दान में दें। इसके अलावा शनिवार के दिन मंदिर जाकर काले तिल, काले कपड़े, सरसों का तेल और पंडित जी की सलाह से दान पुण्य करें।

अनुशासन प्रिय बनें

हर कार्य को नियमित ढ़ग से पूरा करने का प्रयास करें। इससे जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती है। शनि की महादशा से बचने के लिए समय का प्रबंधन बेहद ज़रूरी है।

अपना ख्याल रखें

शारीरिक तनाव और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए योग की मदद लें। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और अन्य प्रकार के उपचार को पूर्ण रूप से लें।

शनि की महादशा कितने वर्षों तक चलती है

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की महादशा किसी व्यक्ति की कुंडली में 19 वर्षों तक रहती है। इससे जीवन में कई उतार चढ़ाव देखने को मिलते है।

व्यक्ति के जीवन को शनि ग्रह कैसे प्रभावित करता है

महादशा के दौरान शनि का प्रभाव करियर, पर्सनल लाईफ और शरीर पर भी होने लगता है। इससे काम में देरी, मानसिक और रिश्तों में खटास व दूरी बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा शरीर में थकान, तनाव, नींद की कमी व हड्डियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती है। 

शनि किस उम्र में अच्छे परिणाम देता है

ऐसी मानयता है कि अगर कुंडली में शनि की महादशा चल रही है, तो उससे जीवन में कई बदलाव आते है। मगर 63 की उम्र के बाद उसका परिणाम सकारात्मक होने लगता है। दरअसल, उसके बाद व्यक्ति के जीवन में धैर्य और अनुशासन आने लगता है। विशेषतौर पर 36 से 42 वर्ष के बीच इस ग्रह का व्यक्ति के जीवन पर शुभ परिणाम नज़र आता है।

हर व्यक्ति पर शनि की महादशा का एक जैसा प्रभाव होता है।

हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है। ऐसे में शनि किस स्थान पर विराजमान है, उससे व्यक्ति के जीवन में उसका प्रभाव तय होता है। कुछ लोगों पर शनि ग्रह के प्रभाव सौम्य होते हैं, तो कुछ लोगों को हर काम में मुश्किलात से होकर गुज़रना पड़ता है।

क्या पूजा करने से शनि का प्रभाव दूर हो जाता है।

नियमानुसार पाठ पूजा करने के अलावा अनुशासन, सदाचार, प्रेमभावना और सकारात्मक व्यवहार किसी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है।

शनि के प्रभाव को कम करने के लिए कौन सा रत्न पहना जाता है

शनि की महादशा से मुक्ति पाने के लिए नीलम रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। मगर किसी वैदिक पंडित या ज्योतिषी व रत्न सलाहकार की मदद से ही सही वज़न और आकार के अनुसार बनवाना चाहिए। इसके अलावा इस बात की भी जानकारी अवश्य लें कि किस दिन, किस उंगली में और कितने बजे पहनना चाहिए। इसके अलावा उत्न पहनते वक्त किस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इससे उसका जीवन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

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