Chaitra Navratri 2026: Kalash sthapna Muhurat and Timings

Decorated earthen kalash placed with marigold flowers and green leaves during Navratri Kalash Sthapana ritual.
Decorated earthen kalash placed with marigold flowers and green leaves during Navratri Kalash Sthapana ritual.
Kalash sthapana, an important ritual performed at the beginning of Navratri. The kalash represents purity, prosperity, and the presence of divine energy.

चैत्र नवरात्रि आरंभ होने वाले हैं, जिसके चलते तैयारियां ज़ोरों पर हैं। इन नौ दिनों में मां के भक्त न केवल दिन के अनुसार उनकी पूजा उपासना करते हैं बल्कि व्रत भी धारण करते है। इन सभी कार्यों में एक कार्य ऐसा भी है, जिससे होती है नवरात्र की शुरूआत। पहले नवरात्रि के दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और उस दिन स्थापित किया जाता है कलश। ऐसी मान्यता है कि इस दिन घटस्थाप्ना यानि घर में मां को स्थापित किया जाता है, जिससे मां की विशेष कृपा अपने भक्तजनों पर सदैव बनी रहती है। 19 तारीख को आरंभ होने वाले नवरात्र के पहले दिन अगर आप भी कलश स्थाप्ना करना चाहते हैं, तो जान लें सबसे पहले शुभ मुहूर्त।  इससे पहले समझते हैं कि घटस्थाप्ना क्या है।

घटस्थाप्ना किसे कहा जाता है

शारत्रीय नवरात्रि के समान ही चैत्र के नवरात्रों में भी घटस्थापना का खास महत्व होता है। इसे एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। नौ दिनों तक पूरे विधि विघान से इसकी पूजा अर्चना की जाती है। इसे देवी का एक प्रतीकात्मक रूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसमें देवी शक्ति का वास होता है। वहीं शास्त्रों में इस बात का भी विस्तृत वर्णन है कि अगर किसी कारणवश अमावस्थ्या, रात्रि या फिर मुहूर्त के बगैर अनुचित समय पर घटस्थापना करते हैं, तो उससे देवी का प्रकोप झेलना पड़ सकता है।

पूरे विधि विधान और उचित नियमों का पालन करके घटस्थाप्ना करने से भक्तजनों को मां की कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों कें अनुसार इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सभी तीर्थों का निवास माना जाता है। नवरात्रि के बाद कलश के जल को घर के सभी कोनों में छिड़काव किया जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा शक्ति बढ़ने लगती है। घटस्थाप्ना नीचे दिए गए मुहूर्त के मुताबिक कर सकते हैं।

घटस्थाप्ना मुहूर्त

चैत्र घटस्थापना बृहस्पतिवार, मार्च 19, 2026 को

घटस्थापना मुहूर्त  06:52 ए एम से 07:43 ए एम

अवधि  00 घण्टे 50 मिनट्

घटस्थापना अभिजित मुहूर्त  12:05 पी एम से 12:53 पी एम

घटस्थाप्ना से पहले रखें इन बातों का ख्याल

नवरात्रि में कलश स्थाप्ना करने से जीवन में सुख समृद्धि बढ़ने लगती है। इससे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

इसके लिए पहले पूजा स्थल को साफ कर लें और गंगा जल छिड़कें। फिर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछा लें।

पूजा के लिए घर का इशान कोण यानि उत्तर पूर्व दिशा शुभ मानी जाती है।

अब मिट्टी का एक बर्तन लेकर उसे जौ यानि जवारे बोएं।

उसके बाद एक तांबे का कलश लेकर उसमें जल को भरकर रख लें और कलावा बांधें।

उसके बाद स्वास्तिक का चिन्ह बना दें। फिर उसपर सुपारी, सिक्का और आम या अशोक के पत्ते रख दें।

साथ ही कलश के उपर एक नारियल भी रखें, ध्यान रखें कि वो लाल कपड़े में लिप्टा हुआ हो।

उसके बाद एक आसन पर बैठकर मंत्रों का जाप करें और मां की आरती करें।

इस बात का ख्याल रखें की घटस्थाप्ना के बाद देवी शक्ति की पूजा करने से पहले भगवान गणेश को याद करें।

पूजा के अंत में मां दुर्गा को धूप जलाकर नैवेद्य अर्पित किया जाता है। उसके बाद मां की आरती करें।

घटस्थापना का आध्यात्मिक महत्व क्या है

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापित करना शुभ मालना जाता है। इसे  ब्रह्मांड का प्रतीक कहा जाता है। ऐसी मानयता है कि इसमें पंचतत्वों का वास होता है। इस दौरान नियमों का पालन करने से जीवन में सुख समृद्धि बढ़ने लगती है। इसे देवी चेतना का आह्वान माना जाता है। घट स्थाप्ना के दौरान मिट्टी या तांबे का कलश प्रयोग किया जाता है। इससे प्रकृति का सृजन होता है। साथ ही मन शुद्ध होता है और मन को बार बार विचलित करने वाले नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिल जाती है। घटस्थाप्ना को साधना का केन्द्र माना जाता है, जिससे मन को एकाग्र किया जा सकता है। इसके नज़दीक प्रज्जवलित किए जाने वाले दीपक से ज्ञान और उर्जा का संचार होता है। 

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