

हिंदू पंचांग के अनुसार हिंदू नववर्ष (Hindu new year 2026) का आरंभ चैत्र महीने में होता है। 19 मार्च को शुरू होने वाली नवरात्रि के साथ ही नए साल की शुरूआत हो जाएगी। ऋतु परिवर्तन के चलते मौसम में भी बदलाव देखने को मिलता है। साल के पहले दिन भगवान की पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में भक्तजनों की लंबी कतारें देखने को मिलती है। हांलाकि नवरात्रि की पूजा के अलावा नवग्रहों की पूजा भी इस दौरान करवाई जाती है, ताकि ग्रहों की शांति और कुंडली में बढ़ने वाले दोषों से मुक्ति प्राप्त हो सके। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पूरे विधि विधान से की गई पूजा से फल की प्राप्ति होती है और पुण्य भी मिलता है।
हिंदू नववर्ष के पहले दिन से नए संवत्सर की शुरूआत होती है। अब यह समझना होगा कि संवत्सर किसे कहते हैं। दरअसल, यह एक प्रकार का चक्र होता है, जो साठ वर्षों तक चलता है और इसमें हर वर्ष का नाम अलग होता है। उत्तर भारत में यह दिन नव सम्वत्सर अथवा हिन्दु नूतन वर्ष(Hindu new year 2026) के रूप में मनाया जाता है। वहीं कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश में इसे उगादी के रूप में मनाते हैं। साथ ही महाराष्ट्र में इस दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है।
साल 2026 (Hindu new year 2026) में होने वाले नए संवत्सर को रौद्र संवत्सर कहा जाता है। इसके राजा बृहस्पति होंगे और मंगल को इसका मंत्री कहा जा रहा है। अगर बृहस्पति ग्रह की बात करें, तो उसे बुद्धि का प्रतीक कहा जाता है। इसके चलते नववर्ष में धर्म, अध्यात्म, सकारात्मक एनर्जी और पराक्रम का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ध्यान देने योग्य बात ये है कि हर साल वर्ष में 12 महीने होते हैं। मगर इस बार साल में 13 महीने होंगे। इसे अतिरिक्त महीने को मलमास या पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसके चलते सभी त्योहार या व्रत संभावित तिथियों से 15 से 20 दिन आगे चले जाते हैं।
मलमास को पुरूषोत्तम मास क्यों कहा जाता है (Malmaas ko Purushottam mass kyu kaha jaata hai)
एक पौराणिक कथा के अनुसार जब अतिरिक्त मास बना, तो किसी भी देवता ने उसेस्वीकार करने से मना कर दिया। सभी उसका त्याग कर रहे थे। उस वक्त भगवान विष्णु ने उसे अपनाया, जिसके चलते उसे पुरूषोत्तम मास कहा जाता है। इसी कारण से इस महीने को भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। ऐसी मान्यता है कि मलमास में जप, तप और पूजा का विशेष महत्व देखने को मिलता है। साल 2026 में अधिकमास 17 मई से 15 जून तक चलेगा।
नववर्ष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
नूतन वर्ष बृहस्पतिवार, 19 मार्च 2026 को शक सम्वत 1948 में प्रारम्भ होगा।
वहीं विक्रम सम्वत 2083 रहेगा
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ मार्च 19, 2026 को 06:52 ए एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त मार्च 20, 2026 को 04:52 ए एम बजे
हिंदू नव वर्ष 2026 (Hindu new year 2026) में पूजा करने का धार्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की इस तिथि को मनाए जाने वाले नववर्ष में नए काम की शुरूआत करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा विधिवत तरीके से पूजा अर्चना करना भी बेहद फलदायी साबित होता है और इस दौरान ॐ ब्रह्माय नमः मंत्र का भी अवश्य जाप करें। इसके अलावा दुर्गा चालीसा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जाता है। साथ ही इस दिन स्नान, दान और नया संकल्प लेना बेहद शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सुख शांति और समृद्धि भी बनी रहती है। साथ ही जीवन में सौभाग्य बढ़ता है और सकारात्मक विचारधारा भी बढ़ने लगती है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरूआत करने से पहले गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है। इसके लिए साल के पहले दिन स्नान करने के बाद भगवान गणेश को 21 गांठ दुर्वा अर्पित करें। भगवान की उपासना के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप भी करें।
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