Navratri Aarti: नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती का महत्व

Devotees performing Maa Durga Aarti with a diya and prayer thali during the Navratri festival.
Devotees performing Maa Durga Aarti with a diya and prayer thali during the Navratri festival.

नवरात्रि का त्योहार मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना का मुख्य पर्व है। इस मौके पर भगवती की कृपा पाने के लिए लोग पूजा और व्रत करते हैं। पूजन के पहले दिन कलश स्थाप्ना के साथ साथ मां की आरती (Navratri Aarti) भी की जाती है। इस अवसर पर मां के भिन्न भिन्न रूपों की पूजा होती है और वे अपने भक्तों को आर्शीवाद प्रदान करती हैं। इन दिनों में मां की पूजा और आरती करने से जीवन में आने वाले संकटों से राहत मिल जाती है और मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। दरअसल, मां दुर्गा को सृजन, संरक्षण और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इनका पूजन करने से जीवन में नकारात्मकता का अंत होता है और सकारात्मकता बढ़ने लगती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवदुर्गा ब्रह्मांड में ऊर्जा का संचार करती हैं। जीवन में बढ़ने वाली बुराईयों को दूर करने के लिए मां की आरती (Navratri Aarti) और उपासना करनी चाहिए। आइए सब मिलकर करते हैं, मां दुर्गा की आरती (Navratri Aarti) जय अंबे गौरी जय श्यामा गौरी।

जय अंबे गौरी जय श्यामा गौरी आरती (Navratri Aarti: Jai Ambe Gauri Jai Shyama Gauri Aarti)

जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय॥

मांग सिन्दूर बिराजत टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोऊ नैना चन्द्र बदन नीको॥ जय॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त पुष्प गल माला कंठन पर साजै॥ जय॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी॥ जय॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति॥ जय॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती॥ जय॥

चण्ड-मुण्ड संहारे शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोऊ मारे, सुर भयहीन करे॥ जय॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी॥ जय॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावत नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू॥ जय॥

तुम ही जगत की माता तुम ही हो भर्ता।
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ता॥ जय॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर-नारी॥ जय॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति॥ जय॥

अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी सुख सम्पत्ति पावै॥ जय॥

भक्तजन की मनोकामना, पूर्ण सब हो जावे॥

नवरात्रि की आरती पढ़ने के लिए कुछ नियमों को भी अपनाएं

माँ का कोई भी भक्त नवरात्रि में मां का पूजन और आरती का पाठ कर सकता है। दरअसल, इसे देवी मां के प्रति उनके भक्तों की सच्ची श्रृद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इससे जीवन को मार्गदर्शन की प्राप्ति होती है।

सुबह उठकर स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ सुथरा कर लें और मां दुर्गा की प्रतिमा और कलश स्थापित करें।

उसके बाद दीपक, अगरबत्ती और कपूर जलाएं। फिर स्वच्छ कपड़े पहनकर मां की आरती करें और पाठ का जाप करें।

मन में किसी तरह के अनुचित विचारों को न लेकर आएं और पूरी श्रृद्धा से मां का नमन करें। इससे मन को शांति मिलती है। इस दौरान बातचीत करने से भी बचें।

मां दुर्गा की आरती करें और फिर उसके बाद सभी भक्तजनों में प्रसाद को बांट दें।

इस पावन अवसर पर जहां कुछ भक्त पूरे नौ दिनों तक पूरे विधि विधान से व्रत करते हैं, तो वहीं दुर्गा माँ की आरती भी करते है। इससे न केवल संकट टल जाते हैं बल्कि तन व मन में भी तालमेल बना रहता है। इससे व्यक्ति को मानसिक शांति की प्रापित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर भक्त दुर्गा मां की आरती का पाठ करते हैं तो उससे जीवन में खुशहाली बढ़ने लगती है। इस पाठ का फल तभी प्राप्त होता है, जब इसका सही उच्चारण किया जाए।

 

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