

पूरे भारतवर्ष में कई दिन पहले से ही हर ओर होली की धूम नज़र आती है। वसंत ऋतु में आने वाला होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का परिचय देता है। इसी कड़ी में मार्च के महीने की 3 तारीख को किया जाएगा होलिका दहन। हांलाकि चंद्र ग्रहण के कारण 2 तारीख को भी होलिका दहन किया जा सकता है। हिंदू कैलेण्डर के अनुसार यह साल का आखिरी त्योहार माना जाता है। जहां एक तरफ इस त्योहार का एक पौराणिक महत्व है और इससे कई कथाएं भी जुड़ी हुई हैं, तो वहीं दूसरी ओर होलिका दहन से उठने वाला धुआं पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब ऋतुओं में परिवर्तन आता है, तो वक्त मच्छर और कीटाणु बढ़ने लगते है। ऐसे में गोबर के उबले जलाने से वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलती है। आइए पहले जानते हैं भक्त प्रहलाद की कहानी
होली से एक दिन पहले क्यों मनाया जाता है होलिका दहन
अक्सर मन में यह सवाल उठता है कि रंगों से खेली जाने वाली होली से पहले होलिका को क्यों जलाया जाता है। इसके पीछे कई कारण है, मगर शुरूआत करते हैं इस पर्व की सुप्रसिद्ध पौराणिक कथा से।
हांलाकि इस बार चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा। दरअसल, ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर बीस मिनट पर शुरू होगा। मगर उसका सूतक 9 घंटे पहने आरंभ हो जाएगा। ऐसे में इस साल होली से दो दिन पहले ही होलिका दहन किया जाएगा।
होलिका दहन की कथा व्यक्ति कां एक मुख्य संदेश देती है। यह कहानी एक दुष्ट पिता हिरण्यकश्यप और भगवान विष्णु के परम भक्त और उनके पुत्र भक्त प्रह्लाद से जुड़ी हुई है। हिरण्यकश्यप एक असुर राजा था और उसे भगवान ब्रह्मा का आर्शीवाद प्राप्त था। उसे एक ऐसा वरदान मिला था कि जिसमें उसे दिन हो या रात, चाहे कोई अस्त्र हो या शस्त्र कोई नहीं मार सकता था । इस वरदान के बाद अब वो खुद को भगवान मानने लगा था। इसी के चलते उसने राज्य में विष्णु भक्ति करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। हांलाकि उनका अपना पुत्र दिनरात विष्णु भगवान की भक्ति में लीन रहता था। अब इसी बात के चलते असुर राजा हिरण्यकश्यप क्रोधित रहने लगे और भक्त प्रह्लाद को मारने का प्रयास करने लगे। इसमें उन्होंने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसके पास एक ऐसी चुनरी थी कि अगर वो उसे ओढ़कर बैठ जाएगी, तो उसे अग्नि छू नहीं पाएगी। अब जब होलिका ने भक्त प्रह्लाद को गोद में लिया और चुनरी को ओढ़ा, तो होलिका जलकर खाक हो गई और नन्हा बालक भगवान विष्णु की भक्ति में लीन हो गया। ईश्वर की भक्ति में लीन भक्त प्रह्लाद को आंच भी नहीं आई और होलिका जलकर भस्म हो गई।
इसके अलावा होलिका दहन का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इसे फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा की रात जीवन से नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करके शांति और संतुष्टि बढ़ाती है। इसी के चलते रात में गाय के गोबर के उपले और लकड़ियों को एकत्रित करके अग्नि प्रज्वलित की जाती है।
साथ ही बुरी शक्तियों को जलाकर अगले दिन रंगों से खोलकर खुशियां मनाई जाती है। अगल दिन न केवल लोग एक दूसरे को रंग गुलाल ही लगाते हैं बल्कि भिन्न भिन्न प्रकार के पकवान भी खाए जाते हैं। इस दिन ठंडाई, दही भल्ले, गुजिया और पुचके यानि गोल गप्पे खाए और खिलाए जाते हैं।
इसके अलावा यह त्योहार ऋतु परिवर्तन का भी संकेत देता है। फाल्गुन के महीने में आने वाला यह त्योहार हिंदू धर्म का आखिरी त्योहार माना जाता है। यह समय सर्दी से गर्मी की ओर परिवर्तन का होता है। ऐसे में अग्नि प्रज्जवलित करके वातावरण में शुद्धि बढ़ने लगती है
कैसे करे घर पर होलिका की पूजा
सबसे पहले पूजा स्थल को साफ कर लें। उसके बाद एक ईट लेकर उसे धो लें और उस स्थान पर रख दें। उसके उपर हवन कुंड रखें। उसमें गोबर के उबले और लकड़ियों से होलिका का आकार दें। अब कुमकुम लगाएं, फूल और चावल चढ़ाएं। उसके बाद सूत के धागे और मौली से परिक्रमा लेते हुए जल भी अर्पित करेंगे।
फिर भोग लगाएं और दीपक जलाएं। होलिका दहन रात में करे और नकारात्मकता को दूर करने की प्रार्थना करे। अगले दिन यानि होली के दिन होलिका से बनने वाली राख से घर में सभी को तिलक लगाएं और होली की शुरूआत करें।
इन चीजों को होलिका दहन में अर्पित करने से मिलेंगे ये फायदे
सूखा नारियल चढ़ाने से मां लक्ष्मी की कृपा पूर्ण रूप से बनी रहेगी। इससे कार्यों में सफलता मिलेगी और धन संबधी समस्याओं से बचा जा सकता है।
काले तिल से सभी ग्रह दोष दूर होंगे और नज़र संबधी परेशानी का भी निवारण होगा। इसके अलावा शनिदेव की कृपा बनी रहेगी।
गाय के गोबर उपले जलाने से घर में बढ़ने वाली नकारात्मक एनर्जी से बचा जा सकता है।
चंदन की लकड़ी से घर में बढ़ने वाले गृह कलेश से बचा जा सकता है। इससे घर में खुशहाली का प्रवेश होगा।
गेहूं की बालियां डालने से घर में अनाज की कमी नहीं होगी और कारोबार में भी बढ़ावा होगा।
पान का पत्ता, लौंग और कपूर जलाने से घर में अगर कोई बीमार है, तो उसका स्वास्थ्य बेहतर हो जाएगा।
कागज़ पर इत्र और शहद लगाकर होलिका दहन में डालकर प्रार्थन करें और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण जाएंगी।
होली में गुलाल क्यों है खास
होली रंगों का त्योहार है और इस दिन सभी लोग एक दूसरे को गुलाल लगाकर इस पर्व को खास बनाते है और बधाई देते हैं। चेहरों पर रंग लगने के साथ सभी लोग एक ही रंग में रंग जाते हैं। हांलाकि पहले समय में रंग को फूलों, चंदन, हल्दी और फलों से बनाए जाते हैं। ऐसे रंग चेहरे को खराब नहीं करते थे।
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