How to Read Your Kundli: Step-by-Step Guide for Beginners

Vedic astrology birth chart (Kundli) with the 12 houses, zodiac signs, and planetary placements, illustrating how beginners can learn to read a Kundli step by step.

आप सभी इस बात को जानते हैं और मानते भी हैं कि अपनी कुंडली (Kundli) को खोलते ही एक दुर्लभ सा चार्ट अपने आप खुल जाता है। जहां अलग अलग ग्रहों के नाम, नक्षत्र और लग्न की जानकारी होती है। साथ ही कुछ अंक भी नज़र आते हैं और कहीं कहीं संस्कृत भाषा में भी कुछ शब्द लिखे होते है। कुंडली में ग्रहों और कुछ उपग्रहों के बारे में भी बताया जाता है। अधिकतर लोगों को केवल शनि, राहू और केतु जैसे ग्रहों और उपग्रहों के नाम ही याद रहते हैं। कुंडली की यह जटिल प्रक्रिया देखकर कोई भी भयभीत हो सकता है। ज़ाहिर है, इन चीजों को देखकर इस बात की जानकारी एकत्रित करना कि कौन सा ग्रह किस घर या भाव में है, थोड़ा सा मुश्किल है। आपकी इसी समस्या को हल करने के लिए हम लेकर आए है, आपके लिए कुंडली को पड़ने की एक स्टेप बाई स्टेप गाइड। इसके माध्यम से हम जान पाऐंगे कि कुंडली कैसे पढ़ें(How to Read Your Kundli )

अपनी कुंडली को खोलते ही एक दुर्लभ सा चार्ट अपने आप खुल जाता है। जहां अलग अलग ग्रहों के नाम, लक्षण और लग्न की जानकारी होती है। साथ ही कुछ अंक भी नज़र आते हैं और कहीं कहीं संस्कृत भाषा में भी कुछ शब्द लिखे होते है। कुंडली में ग्रहों और कुछ उपग्रहों के बारे में भी बताया जाता है। अधिकतर लोगों को केवल शनि, राहू और केतु जैसे ग्रहों और उपग्रहों के नाम ही याद रहते हैं। कुंडली (Kundli) की यह जटिल प्रक्रिया देखकर कोई भी भयभीत हो सकता है। ज़ाहिर है, इन चीजों को देखकर इस बात की जानकारी एकत्रित करना कि कौन सा ग्रह किस घर या भाव में है, थोड़ा सा मुश्किल है। आपकी इसी समस्या को हल करने के लिए हम लेकर आए है, आपके लिए कुंडली को पड़ने की एक स्टेप बाई स्टेप् गाइड। इसके माध्यम से हम जान पाऐंगे कि कुंडली कैसे पढ़ें(How to Read Your Kundli)

हांलाकि कुंडली को समझना बेहद आसान होता है। मगर इसके लिए सबसे पहले ग्रहों, उपग्रहों, लग्न और भाव की जानकारी होनी आवश्यक होती है। ग्रहों और उपग्रहों के अर्थ को जानकर इस बात की पुष्टि होती है कि कौन सा ग्रह कौन से लग्न में किस प्रकार को आप तक पहुंचाने वाला है। कुंडली को पढ़ने की जानकारी लेने से पहले इस बात को भी समझना होगा कि कुंडली का क्या आधार होता है और इसका सही क्रम क्या है। पहले इस बात को समझते है कि कुंडली क्या होती है।

कुंडली किसे कहते हैं (What is Kundli)

आप इस बात को पहले समझ लें कि कुंडली आपके जीवन का एक ऐसा चार्ट है, जिसमें आपके जन्म से लेकर आपके स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, विवाह, संतान, कारोबार समेत हर प्रकार की जानकारी मौजूद होती है। हमारी कुंडली नवग्रहों और 12 भावों यानि घरों में विभाजित होती है। इनकी मदद से आप अपनी कुंडली में हर ग्र्रह के प्रभाव को भलीभांति जान सकते हैं। ज्योतिष की सहायता से किसी भी घटना का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और बीती हुई जानकारी भी पाई जा सकती है। इससे आपको अपने भविष्य की बेहतरीन तस्वीर बनाने में मदद मिलती है। कुंडली के कुछ मुख्य तत्व होते हैं, जिन्हें समझना बेहद आवश्यक होता है।

ग्रह (Planets)

कुंडली में ग्रहों का विशेष योगदान है। इनकी मदद से आ जान सकते हैं कि कौन सा ग्रह इस वक्त किस भाव में है और आपके जीवन को कैसे प्रभावित कर रहा है। इसका अर्थ ये है कि ग्रहों के गोचर से आपकी कौन सी प्रतिभा जागृत हो चुकी है।

  • सूर्य ग्रह व्यक्तित्व, पिता और अधिकार का कारक है
  • चंद्र माता और मन का कारक है
  • मंगल व्यक्ति में साहस और एनर्जी बढ़ती है
  • बुध बुद्धि का कारक होता है। वाणी इनके लिए मुख्य है
  • गुरू ज्ञान और विवेक को दर्शाता है।
  • शुक्र प्रेम और विवाह से संबधी है
  • शनि को न्याय का देवता कहा जाता है। यह अनुशासन प्रिय हैं।
  • राहू और केतु इन दोनों छाया ग्रहों से मन भटक सकता है और आध्यात्म की ओर आप मुड़ने लगते हैं।

राशियां (Zodiac signs)

ज्योतिष के अनुसार 12 राशियां होती है और सबका स्वभाव एक दूसरे से भिन्न होता है। हर राशि के जातक को इस बात की जानकारी मिलती है कि इस समय कौन सा ग्रह उस पर कैसा प्रभाव डाल रहा है। साथ ही ग्रहों की राशियों में अहम भूमिका होती है। जब कोई ग्रह अपनी पसंदीदा राशि में मौजूद होता है, तो वह उसके लिए फलकारक साबित होता है। अगर कमज़ोराशि में है, तो फल में कमी आ जाती है।

कुंडली को पढ़ने और समझने के लिए इन टिप्स को याद रखें (Tips for Kundli reading)

उपर दी गई आसान जानकारी को समझने के बाद अब आप अपनी कुंडली से जुड़ी कुछ विशेष बातों को आसानी से समझ सकते हैं।

लग्न का पता लगाएं

लग्न का उदय राशि कहा जाता है, जो कुंडली का आधार होती है और पूरी कुंडली इसी पर निर्भर रहती है। यह जन्म तिथि, जन्म स्थान और जन्म तिथि पर निर्भर करता है। इस बात का ध्यान इसलिए रखा जाता है क्यों कि लग्न हर दो घंटे में बदल जाता है। यह प्रथम भाव से जुड़ा होता है, जिसका संबध व्यक्ति के शरीर, एनर्जी और व्यक्तित्व को दर्शाता है।

भावों यानि हाउस को समझें

कुंडली में 12 भाव होते हैं और हर भाव जीवन के अलग विषय का प्रतिनिघित्व करता है। इनकी खासियत ये है कि यह कुंडली में बने रहते हैं और अपना स्थान परिवर्तन नहीं करते हैं।

अपने ग्रहों को पहचानिए

इस बात की जानकारी एकत्रित करें कि आपकी कुंडली में कौन सा ग्रह कहां बैठा है यानि किस भाव में है। साथ ही वह किस राशि में मौजूद है। वह राशि उस ग्रह की उच्च राशि है या कमज़ोर राशि है। फिर उसका प्रभाव भी व्यक्ति के जीवन पर वैसा ही नज़र आता है।

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