
बर्थचार्ट देखने पर ग्रहों की दशा और दिशा को समझा जा सकता है। नौ ग्रहों में से कुछ ग्रह जहां शुभ प्रभाव देते हैं, तो वहीं कुछ ग्रहों की महादशा व्यक्ति के जीवन को कई प्रकार से प्रभावित करती है। फिर चाहे धन हो, कारोबार हो या निजी जिंदगी। सरल शब्दों में देखें, तो व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की महादशा किसी व्यक्ति के जीवन में सफलता और संघर्ष की कहानी को तय करती है। सबसे पहले इस बात को समझना बहुत ज़रूरी है कि महादशा क्या और यह किस बात पर निर्भर करती है।
कुंडली में ग्रहों की महादशा किस बात पर निर्भर करती है।
पहले इस बात को जान लेते हैं महादशा किसी व्यक्ति की कुंडली की वह स्थिति होती है, जब कोई विशेष ग्रह आपके जीवन का राजा बन जाता है। अगर किसी व्यक्ति विशेष की कुंडली में कोई ग्रह मज़ूबत स्थिति में होता है, तो उसे उच्च कहा जाता है। वहीं अगर कोई ग्रह कमज़ोर स्थिति में होता है, तो उसे नीच स्थिति में समझा जाता है। यह देखा ज़रूरी होता है कि आपकी कुंडली में कौन सा ग्रह गोचर कर रहा है और यह कितने महीनों और दिनों तक विराजमान रहने वाला है। हर ग्रह की महादशा अलग अलग समय और खंड में विभाजित होती है।
कुछ ग्रह ऐसे भी है, जिनकी अगर महादशा चल रही हो, तो उसका जीवन पर विशेष प्रभाव देखने को मिलता है। चंद्रमा की महादशा होने से व्यक्ति अधिक भावुक महसूस करता है। वहीं मंगल की अगर महादशा हो तो उससे व्यक्ति अधिक क्रोधित और आक्रामक महसूस करता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि या सूर्य की महादशा चलती है, तो उसका प्रभाव उसके करियर पर देखने को मिल जाता है।
जानते हैं कौन सा ग्रह कितने सालों या फिर महीनों तक आपकी कुंडली में विराजमान रहता है।
- सूर्य ग्रह का समय 6 वर्ष तक रहता है और इसका प्रभाव मान सम्मान, सत्ता और पिता को प्रभावित करता है।
- चंद्रमा ग्रह 10 वर्ष तक किसी व्यक्ति की कुंडली में रहता है। इसका प्रभाव किसी व्यक्ति के मनको प्रभावित करता है। इसके अलावा माता के स्वास्थ्य और यात्राओं से जुड़ा होता है।
- मंगल ग्रह का समय 7 वर्ष तक रहता है। इसका प्रभाव भूमि, भाई, साहस और एनर्जी पर होता है।
- केतु ग्रह का समय भी 7 वर्ष होता है। इसका संबध अध्यात्म और वैराग्य से है।
- गुरू ग्रह 16 वर्षों तक कुंडली में विराजमान रहता है। दसका संबध ज्ञान, धन और शिक्षा से है।
- शुक्र ग्रह की महादशा 20 वर्षों तक रहती है। यह प्रेम, कला और विवाह को दर्शाता है।
- राहु ग्रह की महादशा 18 वर्षों की होती है। इसके मुख्य प्रभाव क्षेत्र राजनीति, भ्रम और विदेश से जुड़ी गतिविधियां हैं।
- बुध ग्रह की महादशा 17 वर्षों तक रहती है। इसका असर बुद्धि, व्यापार और वाणी पर दिखता है।
- शनि की महादशा 19 वर्षों तक रहती है। यह न्याय, कर्म और सेवा पर निर्भर करता है।
अक्सर महादशा को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं।
महादशा और अर्तंदशा में क्या अंतर होता है
कुंडली में किसी ग्रह की दशा, महादशा और अंर्तदशा को सुनकर अक्सर लोग डर जाते है। दरअसल, महादशा किसी ग्रह की अवधि को दर्शाता है। वहीं अंर्तदशा इस दौरान दूसरे ग्रह की उन अवधि को कहा जाता है। इसका अर्थ ये है कि कुंडली पर इस प्रकार से दोनों ग्रहों का ही प्रभाव देखने को मिलता है।
क्या उपाय करने से महादशा से मुक्ति मिल सकती है
ज्योतिष के अनुसार अगर महादशा के दौरान उपाय कर लिए जाए, तो उससे ग्रह नक्षत्रों का नकारात्मक प्रभाव कम होने लगता है। ऐसे में दान, मंत्रोच्चारण और पूजा विधि का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।
महादशा को कैसे तय किया जाता है
जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है, उस पल चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उस स्वामी ग्रह से व्यक्ति की महादशा तय होती है। इससे एक विशेष ग्रह की एनर्जी आपके जीवन में सबसे प्रमुख बन जाती है।
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