नरक चतुर्दशी का महत्व यम दीपम 26 अक्टूबर 2019

महत्व इसी दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए एक दीपक मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर जलाया जाता है। इस अनुष्ठान को यमराज के लिए दीपदान या यम दीपम के रूप में जाना जाता है। दीपक को सन्ध्याकाल में जलाया जाता है। ऐसी अवधारणा है कि दीपदान से यमदेव प्रसन्न होते है और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से सुरक्षा करते है।

पूजा विधि- सुबह से ही घर की सफ़ाई आदि का कार्य कर लिया जाता और सायं काल में परिवार के सभी सदस्य शाम को एकत्रित होकर नियमित होने वाली पूजा-पाठ को सम्पन्न करके घर मे घी के दिये जलाते हैं और सरसों के तेल का बडा दीपक बनाकर घर के बाहर रखते हैं। साथ ही धूप जलाकर खील बताशे भी एक दोने में रखकर यमराज का ध्यान करते है और उनसे अकाल मृत्यु के भय को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

पूजा मुहूर्त:

शाम – 05:41 मिनिट से 06:58 मिनिट तक

अवधि – 01 घण्टा 17 मिनट्स

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