अक्षय तृतीया पर करें शुभ कार्यों की शुरुआत ! जानें महत्व

अक्षय तृतीया पर करें शुभ कार्यों की शुरुआत ! जानें महत्व

अक्षय तृतीया के शुभ मुहुर्त:-

अक्षय तृतीया14 मई, 2021
पूजा का शुभ मुहुर्तप्रात: 05: 38 – दोपहर 12:18 तक
कुल अवधि06 घंटे: 39 मिनिट
तृतीया तिथि प्रारम्भ14 मई प्रात: 05:38 से
तृतीया तिथि समाप्त15 मई- प्रात: 07:59 पर

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता हैं। वैदिक कलैण्डर में इसे सर्वाधिक शुभ दिन माना जाता है। ‘अक्षय’ से तात्पर्य है ‘जिसका कभी क्षय न हो’ अर्थात जो कभी नष्ट नहीं होता। यह पर्व सौभाग्य और सफलता का सूचक भी है।

अक्षय तृतीया को ‘अखतीज’ या ‘अक्खा तीज’ भी कहते हैं। धर्म व मानव मूल्यों की रक्षा हेतु श्रीहरि विष्णु देशकाल के अनुसार अनेक रूपों को धारण करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था।

भारत वर्ष में विभिन्नता में एकता पायी जाती है और यहां पर विभिन्न्न व्रत व पर्व मनाये जाते हैं। आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किये गये जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करें

भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिये अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान मांगना चाहिए।

                   ऐसा कहा जाता है कि प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृन्दावन स्थित श्री बांके बिहारी जी के मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं।

इस तिथि में शीतल जल, कलश, चावल, चना, दूध, दही आदि खाद्य व पेय पदार्थों सहित वस्त्राभूषणों का दान अक्षय व अमिट पुण्यकारी माना गया है। सुख शांति की कामना से व सौभाग्य तथा समृद्धि हेतु इस दिन शिव-पार्वती और नर नारायण की पूजा का विधान है

और जो लोग इस दिन देव स्थल व घर में ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ, होम, देव-पितृ तर्पण, जप, दानादि शुभ कर्म करते हैं, उन्हें उन्नत व अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

सौभाग्यवती स्त्रियाँ और कुँवारी कन्याएँ इस दिन गौरी माँ की पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं ।

आज ख़रीदे गये वेशक़ीमती आभूषण एवं सामान शाश्वत समृद्धि के प्रतीक हैं। इस दिन ख़रीदा व धारण किया गया सोना अखण्ड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इस दिन शुरू किये गए किसी भी नये काम या किसी भी काम में लगायी गई पूँजी में सदा सफलता मिलती है

वह फलता-फूलता है। यह माना जाता है कि इस दिन ख़रीदा गया सोना कभी समाप्त नहीं होता, क्योंकि भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो अक्षय तृतीया के दिन बिना पंचांग देखे सभी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह सस्कारादि ,गृह-प्रवेश, नवीन वस्त्र धारण करना, घर, भूखंड, वाहन आभूषण खरीदना, नई संस्था का गठन ,स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना गया है।

इसके अलावा पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान शुभ फ़लदायी है इसके अलावा तीर्थ यात्रा, स्नान, तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन सोना चान्दी और अन्य कीमती धातु खरीदना बहुत ही शुभ रहता है। यह तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में से एक मानी गई है।

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