नवरात्रि का महत्व और लाभ

नवरात्रि का महत्व और लाभ :-

शारदीय नवरात्रि का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। नवरात्रि महोत्सव में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है और नौ दिनों तक पूजन अर्चना करने के पश्चात आखिरी दिन नौ वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा और भोजन तथा दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। यह महोत्सव भारत के लगभग हर प्रान्त में अपने अपने रीति रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। नवरात्रि पूजन से समस्त प्रकार की मनोकामनायें पूर्ण होती हैं । शारीरिक कष्ट और आर्थिक परेशानी से मुक्ति, भौतिक सुखों की प्राप्ति, सन्तान सुख का लाभ, शिक्षा- साक्षात्कार में सफ़लता, वैवाहिक सुख, भाग्य वृध्दि, और रोजगार की समस्या दूर होती है मां शक्ति की पूजा आराधना से ।

नवरात्रि की तिथि :-

इस बार शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष, रविवार 29 सितम्बर 2019 से प्रारम्भ होकर सोमवार 7 अक्टूवर 2019 महा नवमी के दिन समाप्त होगें।

घट स्थापन विधि और सामग्री :-

नवरात्रि शुरु होने से एक दिन पूर्व पूजा की सामग्री- रोली, मौली, जौ-तिल, धूप, दीप, नैवैद्य, फ़ल, फ़ूल, ताम्बूल, वस्त्र और कलश के निमित्त लोटा, सप्तमृतिका, सर्वोषधि एव जटायुक्त नारियल और आम के पत्तों की व्यवस्था कर लें। प्रथम नवरात्रि को प्रात:काल उठकर स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर सर्व प्रथम कलश स्थापना करें। अत: पूजा स्थल के ईशान कोण में आटा या हल्दी से अष्ट दल कमल बनाकर उसके ऊपर धान्य (जौ) रख जल या गंगाजल से पूरित कलश स्थापित करें। उसमें गन्ध, अक्षत, पूंगीफ़ल, सप्तमृतिका, सर्वोषधि और दक्षिणा के रूप में एक सिक्का डाल कर आम के पत्ते रखें और ऊपर से थाली या दोने में चावल भरकर रखें, तदुपरान्त एक जटायुक्त नारियल पर कलावा बांध दोनों हाथ जोड्कर सभी देवी-देवताओं का कलश में आवाहन करें।

पूजन विधि

सर्व प्रथम मण्डप में मां दूर्गा की प्रतिमा का श्रंगार कर गणपति आदि देवताओं की स्थापना करें। देवी के दायीं ओर महालक्ष्मी, गणेश और विजया नामक योगिनी तथा बायीं ओर कार्तिकेय, महासरस्वती और जया नामक योगिनी तथा भगवान शंकर को स्थापित कर हाथों में पुष्प लेकर सभी देवी देवताओं का आवाहन करें। तदुपरान्त पुष्प प्रतिमाओं को समर्पित कर दें और चम्मच में जल लेकर तीन बार प्रतिमाओं पर चढायें। तत्पश्चात दूध, दही, घृत, शक्कर और शहद युक्त पंचामृत से प्रतिमाओं को स्नान करायें। फ़िर साफ़ जल चढायें और वस्त्रादि भेंट करके गन्ध, अक्षत लगाकर पुष्प माला पहनायें। इसके पश्चात धूप, दीप दिखाकर स्वादिष्ट पकवान या मिष्ठानों से सभी देवों को भोग लगायें। ऋतुफ़ल अर्पित करके मुख की शुध्दि के लिये लौंग, इलायची युक्त पान दें और पूजा में किसी भी तरह की कमी की पूर्ति के लिये यथा शक्ति द्रव्य दक्षिणा चढाकर क्षमा याचना करें। दिनभर देवी मां की आराधना करते हुये संध्या काल में “ओम जग जननी जय जय” या “ओम जय अम्बे गौरी” से देवी की भक्ति भाव से आरती करें। नवरात्रि महोत्सव में निरन्तर इसी क्रमानुसार पूजा अर्चना की जानी चाहिये। क्योंकि इन पवित्र दिनों में मां भगवती की पूजा आराधना करने से सभी दु:ख दूर होते हैं और घर परिवार में सुख शान्ति की प्राप्ति होती है।

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